शुक्रवार, 8 जून 2007

आरजुएं हज़ार रखते हैं,
फिर भी हम दिल को मार रखते हैं।

बर्क कम हौसला है, हम भी तो,
दिल के बेकरार रखते हैं।

ना निगह ने पयाम, ने वादा,
नाम को हम भी यार रखते हैं।

------------मीर

कोई टिप्पणी नहीं: