शनिवार, 15 दिसंबर 2007

ठूँठ के गीत

ठूँठ कि वादियाँ,
मरी हुई हरियाली,
जिस पर ठंडी सफ़ेद बर्फ का कफ़न
पूरी कायनात का अब निकालना होगा जनाजा

तुम भी आना मर्सिए में

अपने जाडों की धूप,
पूस कि रात
पूनों कि चाँद,
गर्मी कि छांह,
भादो की पुरवाई,
और ज़रा कोई रुदाली गाना