मंगलवार, 28 जुलाई 2009

स्पंदन का जन्म

कहते हैं की गर्भ में जीवन का अंकुरण एक सुक्ष्म कोशिका से शुरू होता है और धीरे- धीरे इस कोशिका का विकास होता जता है। ये विज्ञान की खोज है और स्थापित सत्य है। पर विज्ञान के परे हमारी आस्थाएं हैं जो हमारे धर्मं और दर्शन से उत्पन्न विश्वास पर आधारित हैं। इस विश्वास के आधार पर चेतना पूर्ण रूप से अंकुरित होती है और इस चेतना का स्वरुप पहले दिन से ही पूर्ण होता है। बीज में जीवन की पुरी संभावनाएं होती हैं।
मेरी होने वाली संतान का भी गर्भ चेतना रूप में पूर्ण है और मैं उसे उस रूप में ही देखता हूँ और आज कल उस की चेतनता से बात चीत करता रहता हूँ।