बुधवार, 14 अगस्त 2013

सास और साँस का उखड़ना

आजकल भारत से हमारी सास आयी हुयी हैं. उनके आये महीने से ऊपर होने को आया तो मैंने  सोचा कि क्यों न सास पर ही कुछ लिखा जाए. फिर कुछ सोचकर हर बार रुक गया. बोल-चाल की भाषा में इसे डरना भी कहते हैं. सास का नाम सुनते ही मन में कई भाव उठते हैं जिनमे प्रमुख हैं - भय, आतंक, कातरता, रोमांच आदि.
खैर बहुत साहस करके मैंने कहा , 'चलो अब ये जोखिम भी उठा ही लेते हैं.'

सालों से हिन्दी लिखने -पढ़ने की आदत छूट गयी है इसलिए लगा कि क्यों न किसी मानक शब्दकोश में 'सास' का अर्थ खोजा जाये. हमारे पास शब्दकोश था नहीं सो हमने हिंखोज(www.hinkhoj.com) पर 'सास' के लिए खोज दर्ज की. हिंखोज ने सास के बदले 'साँस' और उससे बनने वाले मुहावरों की वर्षा कर दी. पहले लगा क्या बकवास सम्पादन है इनका. एक सरल शब्द का मतलब भी नहीं बता सकते. पर शीघ्र ही मेरे दिमाग की बत्ती जली तो फिर लगा कि सम्पादक के चरण पकड़ लूँ. सास शब्द की इतनी गूढ़ विवेचना तो बड़े-बड़े समाजविद भी नहीं कर पाए. हिंखोज के कुछ परिणाम नीचे हैं और उनके भावार्थ मैंने आपकी सहूलियत के लिए लिख दिए हैं.
1. साँस रोकना {saNas rokana} <===> HOLD BREATH, भावार्थ - सास सामने हो तो साँस रोके रहो बेटा.
2. साँस अटकने लगना {saNas aTakane lagana} <=> SUFFOCATE.,
भावार्थ - सास यदि लंबा रह जाए तो साँस रोके-रोके , आपकी साँस अटकने भी लगेगी.
3. साँस की घरघराहट {saNas ki gharagharahaT} <=> WHEEZE
भावार्थ - सास के भय से आवाज नहीं निकलेगी , यदि निकली भी तो घरघराहट के साथ
4. साँस में साँस आना {saNas men saNas Ana} <=> GET BREATH BACK
भावार्थ - लंबी प्रतीक्षा के बाद जब सास के अपने घर लौटने पर सुकून के अहसास को साँस में साँस आना कहते हैं.

 चिंता से चतुराई घटी 

रात बस इतना ही शोध कर पाया. नींद की वजह से नहीं. वो क्या है की बदन में थोड़ी कंपकंपी सी होने लगी तो रुकना पड़ा. सोचा, क्यों न पहले तजुर्बेकार मित्रों से राय ली जाए. क्या पता किस फूस के ढेर में चिंगारी डाल रहा हूँ. सो फेसबुक पर पोस्ट की लिंक चिपका दी , बिलकुल "phone a friend" शैली में . रात में ढंग से नींद नहीं आयी, जरूर सारी रात कुछ डरावने सपने आते रहे. सुबह 6 बजे ही उठ गया.

दोस्तों की टिप्पणियाँ पढीं तो दिल और भी बैठ गया.

किसी ने कहा, 'बेटा, खामखा क्यों खतरा मोल ले रहे हो ?' एक मित्र ने हिदायत दी, 'अब मार खाने को तयार हो जाओ.' बहुत से ऐसे भी थे जिन्होंने पढ़ा तो लेकिन सलाह देने से कतरा गए. मुझे उनसे पूरी सहानुभूति है. दोस्त को मुफ्त का मशवरा देने के चक्कर में अपनी जान खतरे में क्यों डाली जाए. सास से डरने के लिए सास का घर में मौजूद होना जरूरी नहीं, उनका ख़याल बस काफी है.

अपना दबदबा और आतंक बनाये रखने के लिए '‍‍‌मॉम-इन-लॉ ' के पास कई हथियार हैं.

सबसे मारक शस्त्र को 'पत्नी' कहते हैं. जिन्होंने भारत के इतिहास में अंगरेजी राज का दौर पढ़ा है, उन्हें याद होगा. अंगरेजी हुकूमत के दौरान भारत में 700 से ऊपर राजा और रजवाड़े थे. राजा और नवाब लोग बस कहने के हुक्मरान थे. हरेक के दरबार में, अंग्रेजों का नियुक्त एक अफसर होता था, जिसे रेजिडेंट (resident) कहते थे. रेजिडेंट कहने को तो राजा का सलाहकार होता था, पर उसका असली काम था राजा के ऊपर नजर रखना और ज्यादा इधर-उधर की खुराफात दिखी तो उसकी और सल्तनत दोनों की नकेल कस देना. इतना पढ़ कर यदि आपका हाथ अपनी नाक के ऊपर चला गया या आपके नथुनों में हरकत हुई तो फिर आप मर्मज्ञ हैं. आपको पता है कि आपके घर में सास की सल्तनत का स्थायी रेजिडेंट कौन है. यदि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो आप खुशनसीब हैं, आपकी शादी नहीं हुयी है.

'साला' नामक दूसरा हथियार थोड़ा कम घातक है. क्योंकि वो आपकी परिधि से अक्सरहां दूर होता है. दूर से फेंक कर चलाये गए हथियार को अश्त्र भी कहते हैं. पर यदि आपकी किस्मत बुरी हो तो सालाश्त्र भी काफी घातक हो सकता है. यदि साला पुलिस का आला अधिकारी, इंस्पेक्टर, मुहल्ले का गुंडा हो, राजनीति करता हो या फिर आपके ही घर में रहता हो तो मुझे आपके साथ हमदर्दी है.

मेरे केस में, मेरी सास के अस्त्र -शस्त्र दोनों ही बड़े प्रभावी हैं .दोस्त, बीबी, साले कहीं से समर्थन न मिलता देख, मैंने सोचा अब और खतरा लेने से पहले क्यों न मैं शरणागत हो जाऊँ. पढ़ा है सभी शक्तिशाली लोग शरण में आये हुए को क्षति नहीं पहुँचाते. शरणागत का आना उनके पावर-समीकरण को और भी मजबूत करता है.

सुबह-सुबह, दफ्तर जाने के पहले मैंने '‍‍‌मॉम-इन-लॉ ' को गुडमार्निग कहा. तबियत पूछी. फिर सहमते हुए कहा, 'मम्मी, देखिये तो ज़रा आपके लिए क्या लिखा है?'
वो हँसी. बोलीं, ' सुबह से उठ कर यही कर रहे थे क्या? देखें तो क्या है ?'
मैंने कंप्यटर पर पन्ना पहले से ही खोल के रखा था. उन्होंने पढ़ना शुरू किया, मैं दम- साधे, उनके चहरे की भाव-भंगिमा देखता रहा. प्रतिक्रया पढ़ता रहा. पता नहीं अचानक कौन सा अनर्थ हो जाए.
वो पहली पंक्ति पर मुस्कराईं, आख़िरी लाइन तक आते-आते हंसना शुरू कर दिया.


मैंने चैन की सांस ली.

कोई टिप्पणी नहीं: